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mahabharat 1.104.18: जाते समय उन्होंने मुझसे कहा था कि संकट में उनका स्मरण करना। हे महाबाहु भीष्म! यदि आपकी इच्छा हो, तो मैं उन्हीं का स्मरण करूँगा॥18॥   |   mahabharat अध्याय 1.104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.104.18 
स हि मामुक्तवांस्तत्र स्मरे: कृच्छ्रेषु मामिति।
तं स्मरिष्ये महाबाहो यदि भीष्म त्वमिच्छसि॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जाते समय उन्होंने मुझसे कहा था कि संकट में उनका स्मरण करना। हे महाबाहु भीष्म! यदि आपकी इच्छा हो, तो मैं उन्हीं का स्मरण करूँगा॥18॥
 
‘While leaving he had told me to remember him in times of trouble. O mighty-armed Bhishma! If you wish, I will remember him only.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)