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mahabharat 1.104.17: ‘तुम्हारी और मेरी प्रार्थना से वे अतुलनीय तेजस्वी व्यासजी अपने भाई के क्षेत्र में अवश्य ही एक कल्याणकारी सन्तान उत्पन्न करेंगे।॥17॥   |   mahabharat अध्याय 1.104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.104.17 
स नियुक्तो मया व्यक्तं त्वया चाप्रतिमद्युति:।
भ्रातु: क्षेत्रेषु कल्याणमपत्यं जनयिष्यति॥ १७॥
 
 
अनुवाद
‘तुम्हारी और मेरी प्रार्थना से वे अतुलनीय तेजस्वी व्यासजी अपने भाई के क्षेत्र में अवश्य ही एक कल्याणकारी सन्तान उत्पन्न करेंगे।॥17॥
 
‘At your and my request, that incomparably illustrious Vyasa will certainly produce a benevolent offspring in his brother's region.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)