Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.104.16: ‘वह सत्यवादी, शान्त, तपस्वी और निष्पाप है। जन्म लेते ही वह बड़ा हो गया और अपने पिता के साथ उस द्वीप से चला गया।॥16॥   |   mahabharat अध्याय 1.104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.104.16 
सत्यवादी शमपरस्तपस्वी दग्धकिल्बिष:।
समुत्पन्न: स तु महान् सह पित्रा ततो गत:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
‘वह सत्यवादी, शान्त, तपस्वी और निष्पाप है। जन्म लेते ही वह बड़ा हो गया और अपने पिता के साथ उस द्वीप से चला गया।॥16॥
 
‘He is truthful, calm, ascetic and sinless. As soon as he was born, he grew up and left that island with his father.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)