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mahabharat 1.104.15: 'उन भगवान द्वैपायन मुनि ने अपनी आध्यात्मिक शक्तियों से चारों वेदों का पृथक-पृथक वर्णन करके संसार में 'व्यास' की उपाधि प्रदान की है। उनके श्याम वर्ण के कारण लोग उन्हें 'कृष्ण' भी कहते हैं।॥ 15॥   |   mahabharat अध्याय 1.104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.104.15 
यो व्यस्य वेदांश्चतुरस्तपसा भगवानृषि:।
लोके व्यासत्वमापेदे कार्ष्ण्यात् कृष्णत्वमेव च॥ १५॥
 
 
अनुवाद
'उन भगवान द्वैपायन मुनि ने अपनी आध्यात्मिक शक्तियों से चारों वेदों का पृथक-पृथक वर्णन करके संसार में 'व्यास' की उपाधि प्रदान की है। उनके श्याम वर्ण के कारण लोग उन्हें 'कृष्ण' भी कहते हैं।॥ 15॥
 
‘That Lord Dwaipayan Muni, by his spiritual powers, has given the title of ‘Vyasa’ in the world by explaining the four Vedas separately. Due to his dark complexion, people also call him ‘Krishna’.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)