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mahabharat 1.104.14: उस गर्भ से पराशरजी के पुत्र महायोगी महर्षि व्यास प्रकट हुए। वे द्वैपायन नाम से प्रसिद्ध हैं। वे मेरी पुत्री के पुत्र हैं। 14॥   |   mahabharat अध्याय 1.104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.104.14 
पाराशर्यो महायोगी स बभूव महानृषि:।
कन्यापुत्रो मम पुरा द्वैपायन इति श्रुत:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
उस गर्भ से पराशरजी के पुत्र महायोगी महर्षि व्यास प्रकट हुए। वे द्वैपायन नाम से प्रसिद्ध हैं। वे मेरी पुत्री के पुत्र हैं। 14॥
 
‘From that womb, the great yogi Maharishi Vyas, son of Parasharji, appeared. He is famous by the name Dwaipayan. He is the son of my daughter. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)