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mahabharat 1.104.13: तत्पश्चात् ऋषि ने मुझसे कहा, 'यमुना के इस द्वीप पर मेरे द्वारा स्थापित इस गर्भ को त्यागकर तुम पुनः कन्या बन जाओगी।'   |   mahabharat अध्याय 1.104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.104.13 
ततो मामाह स मुनिर्गर्भमुत्सृज्य मामकम्।
द्वीपेऽस्या एव सरित: कन्यैव त्वं भविष्यसि॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् ऋषि ने मुझसे कहा, 'यमुना के इस द्वीप पर मेरे द्वारा स्थापित इस गर्भ को त्यागकर तुम पुनः कन्या बन जाओगी।'
 
Thereafter the sage said to me, 'After abandoning this womb placed by me on this island of the Yamuna, you will again become a girl.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)