Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.104.11-12: यद्यपि मैं ऐसा नहीं चाहता था, फिर भी उन्होंने अपने तेज से मुझे अपमानित किया और नाव पर ही मुझे अपने वश में कर लिया। उस समय उन्होंने कोहरा उत्पन्न करके सम्पूर्ण जगत को अंधकार से ढक दिया। भारत! पहले मेरे शरीर से मछली के समान अत्यन्त घृणित दुर्गन्ध निकलती थी। उसे दूर करके ऋषि ने मुझे यह सुखद गंध प्रदान की॥11-12॥ | mahabharat अध्याय 1.104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अभिभूय स मां बालां तेजसा वशमानयत्।
तमसा लोकमावृत्य नौगतामेव भारत॥ ११॥
मत्स्यगन्धो महानासीत् पुरा मम जुगुप्सित:।
तमपास्य शुभं गन्धमिमं प्रादात् स मे मुनि:॥ १२॥
अनुवाद
यद्यपि मैं ऐसा नहीं चाहता था, फिर भी उन्होंने अपने तेज से मुझे अपमानित किया और नाव पर ही मुझे अपने वश में कर लिया। उस समय उन्होंने कोहरा उत्पन्न करके सम्पूर्ण जगत को अंधकार से ढक दिया। भारत! पहले मेरे शरीर से मछली के समान अत्यन्त घृणित दुर्गन्ध निकलती थी। उसे दूर करके ऋषि ने मुझे यह सुखद गंध प्रदान की॥11-12॥
‘Although I did not want it, he humiliated me with his brilliance and took me under his control on the boat itself. At that time he created fog and covered the entire world with darkness. Bhaarat! Earlier, a very disgusting fish-like stench used to emanate from my body. By removing it, the sage gave me this pleasant smell.॥ 11-12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥