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mahabharat 1.104.1-2: भीष्म कहते हैं - माता! मैं तुम्हें भरतवंश की वंश-परंपरा की वृद्धि और रक्षा का उपाय बताता हूँ; सुनो। जो कोई प्रतिभाशाली ब्राह्मण विचित्रवीर्य की स्त्रियों के गर्भ से संतान उत्पन्न कर सके, उसे तुम धन दो।   |   mahabharat अध्याय 1.104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 104: भीष्मकी सम्मतिसे सत्यवतीद्वारा व्यासका आवाहन और व्यासजीका माताकी आज्ञासे कुरुवंशकी वृद्धिके लिये विचित्रवीर्यकी पत्नियोंके गर्भसे संतानोत्पादन करनेकी स्वीकृति देना  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  1.104.1-2 
भीष्म उवाच
पुनर्भरतवंशस्य हेतुं संतानवृद्धये।
वक्ष्यामि नियतं मातस्तन्मे निगदत: शृणु॥ १॥
ब्राह्मणो गुणवान् कश्चिद् धनेनोपनिमन्त्र्यताम्।
विचित्रवीर्यक्षेत्रेषु य: समुत्पादयेत् प्रजा:॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - माता! मैं तुम्हें भरतवंश की वंश-परंपरा की वृद्धि और रक्षा का उपाय बताता हूँ; सुनो। जो कोई प्रतिभाशाली ब्राह्मण विचित्रवीर्य की स्त्रियों के गर्भ से संतान उत्पन्न कर सके, उसे तुम धन दो।
 
Bhishma says - Mother! I am telling you the method to increase and protect the tradition of progeny of Bharat dynasty; listen. Give money to any talented Brahmin who can produce progeny from the womb of women of Vichitraveerya. 1-2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)