Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.103.6: मैं तुम्हारी धर्मनिष्ठा और तुम्हारे परिवार के उत्तम आचरण को भी देखता हूँ। संकटकाल में शुक्राचार्य और बृहस्पति के समान तुम्हारी बुद्धि उचित कर्तव्य का निर्णय करने में समर्थ है।॥6॥ | mahabharat अध्याय 1.103: सत्यवतीका भीष्मसे राज्यग्रहण और संतानोत्पादनके लिये आग्रह तथा भीष्मके द्वारा अपनी प्रतिज्ञा बतलाते हुए उसकी अस्वीकृति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
व्यवस्थानं च ते धर्मे कुलाचारं च लक्षये।
प्रतिपत्तिं च कृच्छ्रेषु शुक्राङ्गिरसयोरिव॥ ६॥
अनुवाद
मैं तुम्हारी धर्मनिष्ठा और तुम्हारे परिवार के उत्तम आचरण को भी देखता हूँ। संकटकाल में शुक्राचार्य और बृहस्पति के समान तुम्हारी बुद्धि उचित कर्तव्य का निर्णय करने में समर्थ है।॥6॥
‘I also see your devotion to religion and your family's good conduct. In times of crisis, like Shukracharya and Brihaspati, your intellect is capable of deciding the right duty. ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥