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mahabharat 1.103.5: 'धर्मज्ञ! आप सभी धर्मों को संक्षेप में तथा विस्तार से जानते हैं। आपको नाना प्रकार की श्रुतियों तथा समस्त वेदों का पूर्ण ज्ञान है। ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 1.103: सत्यवतीका भीष्मसे राज्यग्रहण और संतानोत्पादनके लिये आग्रह तथा भीष्मके द्वारा अपनी प्रतिज्ञा बतलाते हुए उसकी अस्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 103: सत्यवतीका भीष्मसे राज्यग्रहण और संतानोत्पादनके लिये आग्रह तथा भीष्मके द्वारा अपनी प्रतिज्ञा बतलाते हुए उसकी अस्वीकृति  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.103.5 
वेत्थ धर्मांश्च धर्मज्ञ समासेनेतरेण च।
विविधास्त्वं श्रुतीर्वेत्थ वेदाङ्गानि च सर्वश:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
'धर्मज्ञ! आप सभी धर्मों को संक्षेप में तथा विस्तार से जानते हैं। आपको नाना प्रकार की श्रुतियों तथा समस्त वेदों का पूर्ण ज्ञान है। ॥5॥
 
‘Dharmagya! You know all religions in brief and in detail. You have complete knowledge of various types of Shrutis and all the Vedas. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)