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mahabharat 1.103.24: 'महारानी माता! धर्म की ओर दृष्टि डालो, हम सबका नाश मत करो। क्षत्रिय का सत्य से विमुख होना किसी भी धर्म में अच्छा नहीं माना जाता।॥24॥   |   mahabharat अध्याय 1.103: सत्यवतीका भीष्मसे राज्यग्रहण और संतानोत्पादनके लिये आग्रह तथा भीष्मके द्वारा अपनी प्रतिज्ञा बतलाते हुए उसकी अस्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 103: सत्यवतीका भीष्मसे राज्यग्रहण और संतानोत्पादनके लिये आग्रह तथा भीष्मके द्वारा अपनी प्रतिज्ञा बतलाते हुए उसकी अस्वीकृति  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.103.24 
राज्ञि धर्मानवेक्षस्व मा न: सर्वान् व्यनीनश:।
सत्याच्च्युति: क्षत्रियस्य न धर्मेषु प्रशस्यते॥ २४॥
 
 
अनुवाद
'महारानी माता! धर्म की ओर दृष्टि डालो, हम सबका नाश मत करो। क्षत्रिय का सत्य से विमुख होना किसी भी धर्म में अच्छा नहीं माना जाता।॥24॥
 
‘Queen mother! Look towards Dharma, do not destroy us all. Deviation from the truth by a Kshatriya is not considered good in any Dharma.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)