श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 103: सत्यवतीका भीष्मसे राज्यग्रहण और संतानोत्पादनके लिये आग्रह तथा भीष्मके द्वारा अपनी प्रतिज्ञा बतलाते हुए उसकी अस्वीकृति  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.103.16 
त्यजेच्च पृथ्वी गन्धमापश्च रसमात्मन:।
ज्योतिस्तथा त्यजेद् रूपं वायु: स्पर्शगुणं त्यजेत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी अपनी सुगन्ध छोड़ दे, जल अपना रस छोड़ दे, प्रकाश अपना रूप छोड़ दे और वायु अपना स्वाभाविक स्पर्श गुण छोड़ दे॥16॥
 
‘Let the earth give up its fragrance, let the water give up its juice, let the light give up its form and let the air give up its natural quality called touch.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)