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mahabharat 1.103.12: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! माता और मित्रों के ऐसा कहने पर शत्रुओं का नाश करने वाले भीष्म ने यह धर्मानुकूल उत्तर दिया - 12॥   |   mahabharat अध्याय 1.103: सत्यवतीका भीष्मसे राज्यग्रहण और संतानोत्पादनके लिये आग्रह तथा भीष्मके द्वारा अपनी प्रतिज्ञा बतलाते हुए उसकी अस्वीकृति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 103: सत्यवतीका भीष्मसे राज्यग्रहण और संतानोत्पादनके लिये आग्रह तथा भीष्मके द्वारा अपनी प्रतिज्ञा बतलाते हुए उसकी अस्वीकृति  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.103.12 
वैशम्पायन उवाच
तथोच्यमानो मात्रा स सुहृद्भिश्च परंतप:।
इत्युवाचाथ धर्मात्मा धर्म्यमेवोत्तरं वच:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! माता और मित्रों के ऐसा कहने पर शत्रुओं का नाश करने वाले भीष्म ने यह धर्मानुकूल उत्तर दिया - 12॥
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! When mother and friends said this, Bhishma, the destroyer of enemies, gave this religiously appropriate answer - 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)