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mahabharat 1.102.72-73: धर्मात्मा गंगानन्दन भीष्मजी अपने भाई की मृत्यु से चिन्ता और शोक से भर गये। तब माता सत्यवती की आज्ञा का पालन करने वाले भीष्मजी ने ऋत्विजों तथा कुरुकुल के समस्त श्रेष्ठ पुरुषों के साथ मिलकर राजा विचित्रवीर्य के समस्त भूतकर्मों का कुशलपूर्वक अनुष्ठान करवाया। 72-73॥   |   mahabharat अध्याय 1.102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन  »  श्लोक 72-73
 
 
श्लोक  1.102.72-73 
धर्मात्मा स तु गाङ्गेयश्चिन्ताशोकपरायण:।
प्रेतकार्याणि सर्वाणि तस्य सम्यगकारयत्॥ ७२॥
राज्ञो विचित्रवीर्यस्य सत्यवत्या मते स्थित:।
ऋत्विग्भि: सहितो भीष्म: सर्वैश्च कुरुपुङ्गवै:॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
धर्मात्मा गंगानन्दन भीष्मजी अपने भाई की मृत्यु से चिन्ता और शोक से भर गये। तब माता सत्यवती की आज्ञा का पालन करने वाले भीष्मजी ने ऋत्विजों तथा कुरुकुल के समस्त श्रेष्ठ पुरुषों के साथ मिलकर राजा विचित्रवीर्य के समस्त भूतकर्मों का कुशलपूर्वक अनुष्ठान करवाया। 72-73॥
 
Dharmatma Ganganandan Bhishmaji was filled with worry and grief over the death of his brother. Then Bhishmaji, who followed the orders of Mother Satyavati, along with the Ritvijas and all the best men of Kurukula, got all the ghostly acts of King Vichitravirya done well. 72-73॥
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि विचित्रवीर्योपरमे द्वॺधिकशततमोऽध्याय:॥ १०२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें विचित्रवीर्यका निधनविषयक एक सौ दोवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०२॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)