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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  1.102.68 
आत्मन: प्रतिरूपोऽसौ लब्ध: पतिरिति स्थिते।
विचित्रवीर्यं कल्याण्यौ पूजयामासतु: शुभे॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
वे यह जानकर संतुष्ट हो गईं कि उन्हें अपने योग्य पति मिल गए हैं; इसलिए वे दोनों शुभ स्त्रियाँ बड़े उत्साह के साथ विचित्रवीर्य की सेवा और पूजा करने लगीं।
 
They were satisfied on knowing that they had both got husbands matching their suitability; therefore, those two auspicious ladies began to serve and worship Vichitravirya with great fervour.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)