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mahabharat 1.102.67: उसकी दोनों पत्नियाँ बड़ी हो चुकी थीं। वे सोलह साल की हो चुकी थीं। उनके बाल नीले और घुंघराले थे; उनके हाथ-पैरों के नाखून लाल और लंबे थे; उनके नितंब और स्तन मोटे और उभरे हुए थे। 67.   |   mahabharat अध्याय 1.102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  1.102.67 
ते चापि बृहती श्यामे नीलकुञ्चितमूर्धजे।
रक्ततुङ्गनखोपेते पीनश्रोणिपयोधरे॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
उसकी दोनों पत्नियाँ बड़ी हो चुकी थीं। वे सोलह साल की हो चुकी थीं। उनके बाल नीले और घुंघराले थे; उनके हाथ-पैरों के नाखून लाल और लंबे थे; उनके नितंब और स्तन मोटे और उभरे हुए थे। 67.
 
Both his wives were grown up. They had reached the age of sixteen. Their hair was blue and curly; the nails of their hands and feet were red and long; their buttocks and breasts were plump and prominent. 67.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)