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mahabharat 1.102.66: उन दोनों का विवाह स्वीकार करके वह धर्मात्मा रूप और यौवन के गर्व से युक्त होकर विचित्रवीर्य कामात्मा हो गया ॥66॥   |   mahabharat अध्याय 1.102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  1.102.66 
तयो: पाणी गृहीत्वा तु रूपयौवनदर्पित:।
विचित्रवीर्यो धर्मात्मा कामात्मा समपद्यत॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
उन दोनों का विवाह स्वीकार करके वह धर्मात्मा रूप और यौवन के गर्व से युक्त होकर विचित्रवीर्य कामात्मा हो गया ॥66॥
 
By adopting the marriage of both of them, the religious soul, filled with pride of beauty and youth, became a Vichitravirya Kamatma. 66॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)