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mahabharat 1.102.64: वे स्वयं धर्म के विद्वान थे, फिर भी उन्होंने वेदों में पारंगत ब्राह्मणों से इस विषय पर विचार-विमर्श करके काशीराज की ज्येष्ठ पुत्री अम्बा को उस समय शाल्व के यहाँ जाने की अनुमति दे दी।   |   mahabharat अध्याय 1.102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  1.102.64 
विनिश्चित्य स धर्मज्ञो ब्राह्मणैर्वेदपारगै:।
अनुजज्ञे तदा ज्येष्ठामम्बां काशिपते: सुताम्॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
वे स्वयं धर्म के विद्वान थे, फिर भी उन्होंने वेदों में पारंगत ब्राह्मणों से इस विषय पर विचार-विमर्श करके काशीराज की ज्येष्ठ पुत्री अम्बा को उस समय शाल्व के यहाँ जाने की अनुमति दे दी।
 
He himself was a learned man of Dharma, yet after discussing the matter with the Brahmins well versed in the Vedas, he gave permission to Amba, the eldest daughter of the King of Kashi, to go to Shalva's place at that time. 64.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)