Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.102.63: जब कन्या ने ब्राह्मणों की उपस्थिति में वीर भीष्म से यह बात कही, तो वे विवाह समारोह के विषय में तर्कपूर्वक विचार करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 1.102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  1.102.63 
एवमुक्तस्तया भीष्म: कन्यया विप्रसंसदि।
चिन्तामभ्यगमद् वीरो युक्तां तस्यैव कर्मण:॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
जब कन्या ने ब्राह्मणों की उपस्थिति में वीर भीष्म से यह बात कही, तो वे विवाह समारोह के विषय में तर्कपूर्वक विचार करने लगे।
 
When the girl said this to the valiant Bhishma in the presence of the Brahmins, he began to think logically about the marriage ceremony. 63.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)