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mahabharat 1.102.62: उस स्वयंवर में मुझे केवल राजा शाल्व को ही चुनना था। हे धर्म के ज्ञाता! इन सब बातों पर विचार करो और जो धर्म का सार जान पड़े, वही करो।॥ 62॥   |   mahabharat अध्याय 1.102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  1.102.62 
मया वरयितव्योऽभूच्छाल्वस्तस्मिन् स्वयंवरे।
एतद् विज्ञाय धर्मज्ञ धर्मतत्त्वं समाचर॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
उस स्वयंवर में मुझे केवल राजा शाल्व को ही चुनना था। हे धर्म के ज्ञाता! इन सब बातों पर विचार करो और जो धर्म का सार जान पड़े, वही करो।॥ 62॥
 
'In that swayamvara I had to choose only King Shalva. O knower of Dharma! Think over all these matters and do that which seems to be the essence of Dharma.'॥ 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)