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mahabharat 1.102.61: 'धर्मात्मा! मैंने मन ही मन सौभ नामक विमान के स्वामी राजा शाल्व को पति के रूप में वरण कर लिया था। उन्होंने भी पूर्वकाल में मुझे वरण किया था। मेरे पिता भी यही चाहते थे कि मेरा विवाह शाल्व से हो। 61।   |   mahabharat अध्याय 1.102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  1.102.61 
मया सौभपति: पूर्वं मनसा हि वृत: पति:।
तेन चास्मि वृता पूर्वमेष कामश्च मे पितु:॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
'धर्मात्मा! मैंने मन ही मन सौभ नामक विमान के स्वामी राजा शाल्व को पति के रूप में वरण कर लिया था। उन्होंने भी पूर्वकाल में मुझे वरण किया था। मेरे पिता भी यही चाहते थे कि मेरा विवाह शाल्व से हो। 61।
 
‘Dharmatman! I had already chosen King Shalva, the ruler of the aircraft named Saubha, as my husband in my mind. He too had chosen me in the past. My father also wished that I should marry Shalva. 61.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)