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mahabharat 1.102.6-7: उस समय राजाओं का नाम-परिचय हो रहा था। तभी वृद्ध शान्तनु नन्दन भीष्म अकेले ही वहाँ आ पहुँचे। उन्हें देखकर वे सभी सुन्दर कन्याएँ चिन्तित हो गईं और उन्हें बूढ़ा समझकर वहाँ से भाग गईं।   |   mahabharat अध्याय 1.102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  1.102.6-7 
कीर्त्यमानेषु राज्ञां तु तदा नामसु सर्वश:।
एकाकिनं तदा भीष्मं वृद्धं शान्तनुनन्दनम्॥ ६॥
सोद्वेगा इव तं दृष्ट्वा कन्या: परमशोभना:।
अपाक्रामन्त ता: सर्वा वृद्ध इत्येव चिन्तया॥ ७॥
 
 
अनुवाद
उस समय राजाओं का नाम-परिचय हो रहा था। तभी वृद्ध शान्तनु नन्दन भीष्म अकेले ही वहाँ आ पहुँचे। उन्हें देखकर वे सभी सुन्दर कन्याएँ चिन्तित हो गईं और उन्हें बूढ़ा समझकर वहाँ से भाग गईं।
 
At that time, kings were being introduced by name. Just then, Shantanu Nandan Bhishma, who had grown old, arrived there alone. Seeing him, all those beautiful girls became anxious and ran away from there thinking that he was old. 6-7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)