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mahabharat 1.102.49-53: तत्पश्चात् ऐन्द्रास्त्र अपने श्रेष्ठ घोड़ों को लेकर यमलोक को चला गया। नरश्रेष्ठ! उस समय शान्तनुनन्दन भीष्म ने युद्ध करके शाल्व को कन्याओं के लिए जीत लिया और श्रेष्ठ शाल्व भी केवल प्राण त्यागकर चला गया। जनमेजय! उस समय शाल्व अपनी राजधानी लौटकर धर्मपूर्वक राज्य करने लगा। इसी प्रकार जो राजा शत्रु नगर को जीतकर स्वयंवर देखने की इच्छा से वहाँ आये थे, वे भी अपने-अपने देश को लौट गए। आक्रमणकारी योद्धाओं में श्रेष्ठ भीष्म उन कन्याओं को जीतकर हस्तिनापुर चले गए; जहाँ धर्मात्मा कुरुवंशी राजा विचित्रवीर्य इस पृथ्वी पर राज्य करते थे।   |   mahabharat अध्याय 1.102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन  »  श्लोक 49-53
 
 
श्लोक  1.102.49-53 
अस्त्रेण चास्याथैन्द्रेण न्यवधीत् तुरगोत्तमान्।
कन्याहेतोर्नरश्रेष्ठ भीष्म: शान्तनवस्तदा॥ ४९॥
जित्वा विसर्जयामास जीवन्तं नृपसत्तमम्।
तत: शाल्व: स्वनगरं प्रययौ भरतर्षभ॥ ५०॥
स्वराज्यमन्वशाच्चैव धर्मेण नृपतिस्तदा।
राजानो ये च तत्रासन् स्वयंवरदिदृक्षव:॥ ५१॥
स्वान्येव तेऽपि राष्ट्राणि जग्मु: परपुरंजया:।
एवं विजित्य ता: कन्या भीष्म: प्रहरतां वर:॥ ५२॥
प्रययौ हास्तिनपुरं यत्र राजा स कौरव:।
विचित्रवीर्यो धर्मात्मा प्रशास्ति वसुधामिमाम्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् ऐन्द्रास्त्र अपने श्रेष्ठ घोड़ों को लेकर यमलोक को चला गया। नरश्रेष्ठ! उस समय शान्तनुनन्दन भीष्म ने युद्ध करके शाल्व को कन्याओं के लिए जीत लिया और श्रेष्ठ शाल्व भी केवल प्राण त्यागकर चला गया। जनमेजय! उस समय शाल्व अपनी राजधानी लौटकर धर्मपूर्वक राज्य करने लगा। इसी प्रकार जो राजा शत्रु नगर को जीतकर स्वयंवर देखने की इच्छा से वहाँ आये थे, वे भी अपने-अपने देश को लौट गए। आक्रमणकारी योद्धाओं में श्रेष्ठ भीष्म उन कन्याओं को जीतकर हस्तिनापुर चले गए; जहाँ धर्मात्मा कुरुवंशी राजा विचित्रवीर्य इस पृथ्वी पर राज्य करते थे।
 
After that, Andrastra took his best horses to Yamalok. Male best! At that time, Shantanunandan Bhishma won Shalva by fighting for the daughters and even the best Shalva left only his life. Janamejaya! At that time Shalva returned to his capital and started ruling the kingdom religiously. Similarly, the kings who had conquered the enemy city and had come there with the desire to see the Swayamvar, also went back to their respective countries. Bhishma, the best among the attacking warriors, won those girls and went to Hastinapura; Where the virtuous Kuruvanshi king Vichitravirya used to rule this earth. 49-53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)