Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.102.47: जनमेजय! तत्पश्चात् कुरुनंदन भीष्म ने अपने धनुष पर वरुणास्त्र को ठीक प्रकार से चढ़ाया और उससे शाल्वराज के चारों घोड़ों को कुचल दिया॥4 7॥   |   mahabharat अध्याय 1.102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  1.102.47 
ततोऽस्त्रं वारुणं सम्यग् योजयामास कौरव:।
तेनाश्वांश्चतुरोऽमृद्नच्छाल्वराजस्य भूपते॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! तत्पश्चात् कुरुनंदन भीष्म ने अपने धनुष पर वरुणास्त्र को ठीक प्रकार से चढ़ाया और उससे शाल्वराज के चारों घोड़ों को कुचल दिया॥4 7॥
 
Janamejaya! Thereafter, Kurunandan Bhishma properly adjusted the Varunastra on his bow and with it he trampled the four horses of Shalvaraja. 4 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)