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mahabharat 1.102.45: क्षत्रियों के उन वचनों को सुनकर शत्रुओं की राजधानी को जीतने वाले शान्तनुपुत्र भीष्म क्रोधित हो गए और उन्होंने शाल्व से कहा, 'दृढ़ रहो, दृढ़ रहो।'   |   mahabharat अध्याय 1.102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  1.102.45 
क्षत्रियाणां ततो वाच: श्रुत्वा परपुरंजय:।
क्रुद्ध: शान्तनवो भीष्मस्तिष्ठ तिष्ठेत्यभाषत॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
क्षत्रियों के उन वचनों को सुनकर शत्रुओं की राजधानी को जीतने वाले शान्तनुपुत्र भीष्म क्रोधित हो गए और उन्होंने शाल्व से कहा, 'दृढ़ रहो, दृढ़ रहो।'
 
Hearing those words of the Kshatriyas, Shantanu's son Bhishma, conqueror of the enemy's capital, became angry and said to Shalva, 'Stand firm, stand firm.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)