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mahabharat 1.102.44: युद्धमें उसकी चपलता देखकर सब राजा बहुत प्रसन्न हुए और वचनोंसे शालवनराजकी प्रशंसा करने लगे ॥44॥   |   mahabharat अध्याय 1.102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  1.102.44 
लाघवं तस्य ते दृष्ट्वा समरे सर्वपार्थिवा:।
अपूजयन्त संहृष्टा वाग्भि: शाल्वं नराधिपम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
युद्धमें उसकी चपलता देखकर सब राजा बहुत प्रसन्न हुए और वचनोंसे शालवनराजकी प्रशंसा करने लगे ॥44॥
 
Seeing his agility in the war all the kings became very pleased and began praising the King of Shaalvan with their words. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)