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mahabharat 1.102.41: वे दोनों बलवान योद्धा एक दूसरे से ऐसे गर्जना करते हुए भिड़ गए जैसे दो बैल मैथुन हेतु इच्छुक गाय के लिए लड़ रहे हों। दोनों ही बल और पराक्रम से सुशोभित थे॥41॥   |   mahabharat अध्याय 1.102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  1.102.41 
तौ वृषाविव नर्दन्तौ बलिनौ वासितान्तरे।
अन्योन्यमभ्यवर्तेतां बलविक्रमशालिनौ॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों बलवान योद्धा एक दूसरे से ऐसे गर्जना करते हुए भिड़ गए जैसे दो बैल मैथुन हेतु इच्छुक गाय के लिए लड़ रहे हों। दोनों ही बल और पराक्रम से सुशोभित थे॥41॥
 
These two strong warriors clashed with each other roaring like two bulls fighting for a cow that wanted to mate. Both were adorned with strength and valour. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)