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mahabharat 1.102.39: क्षत्रिय धर्म का आश्रय लेकर महारथी भीष्म ने अपना सारा भय और चिंता त्याग दी और अपना रथ शाल्व की ओर मोड़ दिया।   |   mahabharat अध्याय 1.102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  1.102.39 
क्षत्रधर्मं समास्थाय व्यपेतभयसम्भ्रम:।
निवर्तयामास रथं शाल्वं प्रति महारथ:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
क्षत्रिय धर्म का आश्रय लेकर महारथी भीष्म ने अपना सारा भय और चिंता त्याग दी और अपना रथ शाल्व की ओर मोड़ दिया।
 
Taking refuge in the kshatriya dharma, the mighty warrior Bhishma left all his fear and anxiety and turned his chariot towards Shalva.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)