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mahabharat 1.102.3: महाराज! उन दिनों काशी नरेश की तीन पुत्रियाँ थीं, जो अप्सराओं के समान सुन्दर थीं। भीष्मजी ने सुना कि वे तीनों पुत्रियाँ स्वयंवर सभा में एक साथ अपने वर चुनने जा रही हैं।   |   mahabharat अध्याय 1.102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.102.3 
अथ काशिपतेर्भीष्म: कन्यास्तिस्रोऽप्सरोपमा:।
शुश्राव सहिता राजन् वृण्वाना वै स्वयंवरम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उन दिनों काशी नरेश की तीन पुत्रियाँ थीं, जो अप्सराओं के समान सुन्दर थीं। भीष्मजी ने सुना कि वे तीनों पुत्रियाँ स्वयंवर सभा में एक साथ अपने वर चुनने जा रही हैं।
 
King! In those days the King of Kashi had three daughters who were as beautiful as Apsaras. Bhishmaji heard that all three daughters were going to choose their husbands together in the Swayamvar Sabha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)