श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 102: भीष्मके द्वारा स्वयंवरसे काशिराजकी कन्याओंका हरण, युद्धमें सब राजाओं तथा शाल्वकी पराजय, अम्बिका और अम्बालिकाके साथ विचित्रवीर्यका विवाह तथा निधन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.102.10 
वैशम्पायन उवाच
क्षत्रियाणां वच: श्रुत्वा भीष्मश्चुक्रोध भारत॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! क्षत्रियों के ये वचन सुनकर भीष्म अत्यन्त क्रोधित हो गये।
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! On hearing these words of the Kshatriyas, Bhishma became very angry.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)