Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.101.7: वह न केवल मनुष्यों की, बल्कि देवताओं और राक्षसों की भी निंदा करता था। फिर एक दिन उसके ही नाम का एक शक्तिशाली गंधर्व राजा चित्रांगद उसके पास आया।   |   mahabharat अध्याय 1.101: सत्यवतीके गर्भसे चित्रांगद और विचित्रवीर्यकी उत्पत्ति, शान्तनु और चित्रांगदका निधन तथा विचित्रवीर्यका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 101: सत्यवतीके गर्भसे चित्रांगद और विचित्रवीर्यकी उत्पत्ति, शान्तनु और चित्रांगदका निधन तथा विचित्रवीर्यका राज्याभिषेक  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.101.7 
तं क्षिपन्तं सुरांश्चैव मनुष्यानसुरांस्तथा।
गन्धर्वराजो बलवांस्तुल्यनामाभ्ययात् तदा॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वह न केवल मनुष्यों की, बल्कि देवताओं और राक्षसों की भी निंदा करता था। फिर एक दिन उसके ही नाम का एक शक्तिशाली गंधर्व राजा चित्रांगद उसके पास आया।
 
Not only did he criticize humans, he also criticized gods and demons. Then one day a mighty Gandharva king Chitrangada who had the same name as him came to him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)