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mahabharat 1.101.6: चित्रांगद को अपनी वीरता पर अभिमान हो गया और वह सभी राजाओं का तिरस्कार करने लगा। वह किसी को भी अपने बराबर नहीं समझता था।   |   mahabharat अध्याय 1.101: सत्यवतीके गर्भसे चित्रांगद और विचित्रवीर्यकी उत्पत्ति, शान्तनु और चित्रांगदका निधन तथा विचित्रवीर्यका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.101.6 
स तु चित्राङ्गद: शौर्यात् सर्वांश्चिक्षेप पार्थिवान्।
मनुष्यं न हि मेने स कञ्चित् सदृशमात्मन:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
चित्रांगद को अपनी वीरता पर अभिमान हो गया और वह सभी राजाओं का तिरस्कार करने लगा। वह किसी को भी अपने बराबर नहीं समझता था।
 
Chitrangada became proud of his bravery and started despising all the kings. He did not consider any person as his equal. 6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)