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mahabharat 1.101.4: पुरुषों में श्रेष्ठ विचित्रवीर्य अभी यौवन प्राप्त भी नहीं कर पाए थे कि बुद्धिमान महाराज शान्तनु का देहान्त हो गया ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 1.101: सत्यवतीके गर्भसे चित्रांगद और विचित्रवीर्यकी उत्पत्ति, शान्तनु और चित्रांगदका निधन तथा विचित्रवीर्यका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 101: सत्यवतीके गर्भसे चित्रांगद और विचित्रवीर्यकी उत्पत्ति, शान्तनु और चित्रांगदका निधन तथा विचित्रवीर्यका राज्याभिषेक  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.101.4 
अप्राप्तवति तस्मिंस्तु यौवनं पुरुषर्षभे।
स राजा शान्तनुर्धीमान् कालधर्ममुपेयिवान्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
पुरुषों में श्रेष्ठ विचित्रवीर्य अभी यौवन प्राप्त भी नहीं कर पाए थे कि बुद्धिमान महाराज शान्तनु का देहान्त हो गया ॥4॥
 
Vichitravirya, the best of men, had not yet attained puberty when the wise Maharaja Shantanu died. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)