Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.101.14: शान्तनु नन्दन भीष्म धर्म और राजनीति के शास्त्रों में पारंगत थे; इसलिए राजा विचित्रवीर्य ने उनका धर्मपूर्वक आदर किया और भीष्म जी ने भी इस युवा राजा की हर प्रकार से रक्षा की ॥ 14॥ | mahabharat अध्याय 1.101: सत्यवतीके गर्भसे चित्रांगद और विचित्रवीर्यकी उत्पत्ति, शान्तनु और चित्रांगदका निधन तथा विचित्रवीर्यका राज्याभिषेक । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स धर्मशास्त्रकुशलं भीष्मं शान्तनवं नृप:।
पूजयामास धर्मेण स चैनं प्रत्यपालयत्॥ १४॥
अनुवाद
शान्तनु नन्दन भीष्म धर्म और राजनीति के शास्त्रों में पारंगत थे; इसलिए राजा विचित्रवीर्य ने उनका धर्मपूर्वक आदर किया और भीष्म जी ने भी इस युवा राजा की हर प्रकार से रक्षा की ॥ 14॥
Shantanu Nandan Bhishma was well versed in the scriptures of religion and politics; therefore King Vichitravirya respected him righteously and Bhishma Ji also protected this young king in every possible way. ॥ 14॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि चित्राङ्गदोपाख्याने एकाधिकशततमोऽध्याय:॥ १०१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें चित्रांगदोपाख्यानविषयक एक सौ एकवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०१॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ३ श्लोक मिलाकर कुल १७ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥