श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  1.100.97 
वैशम्पायन उवाच
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा सम्प्रहृष्टतनूरुह:।
ददानीत्येव तं दाशो धर्मात्मा प्रत्यभाषत॥ ९७॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - देवव्रतके ये वचन सुनकर धर्मात्मा निषादराजके रोंगटे खड़े हो गए। उन्होंने तुरन्त उत्तर दिया - 'मैं इस कन्याको अवश्य ही तुम्हारे पिताको दूँगा।'॥97॥
 
Vaishampayana says - On hearing these words of Devavrata, the virtuous Nishadraja got goosebumps. He immediately replied - 'I will definitely give this girl to your father'.॥ 97॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)