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mahabharat 1.100.90: परंतु सौम्य! इस विषय में मुझे तुमसे कुछ और भी कहना है और वह अत्यन्त महत्वपूर्ण बात है; अतः मेरी बात सुनो। हे शत्रुनाश करने वाले! कन्याओं के प्रति स्नेह रखने वाले बन्धु-बान्धवों के स्वभाव के अनुसार मैं तुमसे प्रार्थना करूँगा॥ 90॥   |   mahabharat अध्याय 1.100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  1.100.90 
इदं तु वचनं सौम्य कार्यं चैव निबोध मे।
कौमारिकाणां शीलेन वक्ष्याम्यहमरिन्दम॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
परंतु सौम्य! इस विषय में मुझे तुमसे कुछ और भी कहना है और वह अत्यन्त महत्वपूर्ण बात है; अतः मेरी बात सुनो। हे शत्रुनाश करने वाले! कन्याओं के प्रति स्नेह रखने वाले बन्धु-बान्धवों के स्वभाव के अनुसार मैं तुमसे प्रार्थना करूँगा॥ 90॥
 
'But Saumya! I have something more to say to you in this matter and that is an important matter; therefore, please listen to what I say. O destroyer of enemies! I will make a request to you based on the nature of relatives who have affection for girls.॥ 90॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)