Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.100.86: हे सत्यवचनों में श्रेष्ठ निषाद्रराज! मेरी इस सत्यवचन को सुनो और इसे स्वीकार करो। ऐसा कहनेवाला न तो आज तक कोई मनुष्य उत्पन्न हुआ है और न भविष्य में होगा॥ 86॥ | mahabharat अध्याय 1.100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इदं मे व्रतमादत्स्व सत्यं सत्यवतां वर।
नैव जातो न वाजात ईदृशं वक्तुमुत्सहेत्॥ ८६॥
अनुवाद
हे सत्यवचनों में श्रेष्ठ निषाद्रराज! मेरी इस सत्यवचन को सुनो और इसे स्वीकार करो। ऐसा कहनेवाला न तो आज तक कोई मनुष्य उत्पन्न हुआ है और न भविष्य में होगा॥ 86॥
'O king of Nishadras, the best among the truthful ones! Listen to this true promise of mine and accept it. No man has been born till now nor will be born in the future who can say such a thing.॥ 86॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥