Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.100.80: हे भाई! उन्होंने तुम्हारे पिता के विषय में मुझसे अनेक बार चर्चा की थी। वे कहते थे कि केवल धर्मात्मा राजा शान्तनु ही सत्यवती से विवाह करने के योग्य हैं।   |   mahabharat अध्याय 1.100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  1.100.80 
तेन मे बहुशस्तात पिता ते परिकीर्तित:।
अर्ह: सत्यवतीं वोढुं धर्मज्ञ: स नराधिप:॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
हे भाई! उन्होंने तुम्हारे पिता के विषय में मुझसे अनेक बार चर्चा की थी। वे कहते थे कि केवल धर्मात्मा राजा शान्तनु ही सत्यवती से विवाह करने के योग्य हैं।
 
O dear brother! He had discussed with me many times about your father. He used to say that only the righteous King Shantanu was fit to marry Satyavati. 80.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)