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mahabharat 1.100.75: यह सुनकर कुमार देवव्रत वृद्ध क्षत्रियों के साथ निषाद्रों के राजा के पास गए और अपने पिता के लिए उनकी पुत्री मांगी।   |   mahabharat अध्याय 1.100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  1.100.75 
ततो देवव्रतो वृद्धै: क्षत्रियै: सहितस्तदा।
अभिगम्य दाशराजं कन्यां वव्रे पितु: स्वयम्॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर कुमार देवव्रत वृद्ध क्षत्रियों के साथ निषाद्रों के राजा के पास गए और अपने पिता के लिए उनकी पुत्री मांगी।
 
On hearing this, Kumar Devavrata then went to the King of Nishadras accompanied by old Kshatriyas and asked for his daughter for his father.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)