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mahabharat 1.100.74: भरतश्रेष्ठ! कुरुवंश के श्रेष्ठ पुरुष देवव्रत ने जब ध्यानपूर्वक पूछा, तब वृद्ध मंत्री ने बताया कि महाराज एक कन्या से विवाह करना चाहते हैं ॥74॥   |   mahabharat अध्याय 1.100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  1.100.74 
तस्मै स कुरुमुख्याय यथावत् परिपृच्छते।
वरं शशंस कन्यां तामुद्दिश्य भरतर्षभ॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! कुरुवंश के श्रेष्ठ पुरुष देवव्रत ने जब ध्यानपूर्वक पूछा, तब वृद्ध मंत्री ने बताया कि महाराज एक कन्या से विवाह करना चाहते हैं ॥74॥
 
Bharatshrestha! When Devavrata, the best man of the Kuru dynasty, inquired carefully, the old minister told that Maharaj wanted to marry a girl. 74॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)