Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.100.71: "इसीलिए मुझे संदेह हो रहा है कि आपके चुप हो जाने पर यह कुल-परम्परा किस प्रकार चलेगी। पिताजी! यही मेरे दुःख का कारण है; मैंने आपसे सब कुछ कह दिया है।" ॥71॥ | mahabharat अध्याय 1.100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सोऽस्मि संशयमापन्नस्त्वयि शान्ते कथं भवेत्।
इति ते कारणं तात दु:खस्योक्तमशेषत:॥ ७१॥
अनुवाद
"इसीलिए मुझे संदेह हो रहा है कि आपके चुप हो जाने पर यह कुल-परम्परा किस प्रकार चलेगी। पिताजी! यही मेरे दुःख का कारण है; मैंने आपसे सब कुछ कह दिया है।" ॥71॥
"That is why I am in doubt as to how this family tradition will be carried on after you become silent. Father! This is the reason for my sorrow; I have told you everything." ॥ 71॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥