Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.100.7: वे सदैव धर्म में दृढ़ रहने वाले और समस्त पुण्यात्माओं में श्रेष्ठ थे; इसलिए समस्त राजाओं ने मिलकर राजा शान्तनु को राजराजेश्वर (सम्राट) पद पर अभिषिक्त किया॥ 7॥ | mahabharat अध्याय 1.100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वर्तमानं हि धर्मेषु सर्वधर्मभृतां वरम्।
तं महीपा महीपालं राजराज्येऽभ्यषेचयन्॥ ७॥
अनुवाद
वे सदैव धर्म में दृढ़ रहने वाले और समस्त पुण्यात्माओं में श्रेष्ठ थे; इसलिए समस्त राजाओं ने मिलकर राजा शान्तनु को राजराजेश्वर (सम्राट) पद पर अभिषिक्त किया॥ 7॥
He was always steadfast in Dharma and was the best among all the virtuous people; therefore, all the kings together anointed King Shantanu as Rajarajeswara (Emperor).॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥