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mahabharat 1.100.6: ये सभी गुण महाबली और पराक्रमी शान्तनु में विद्यमान थे। उनके समान धर्मपूर्वक शासन करने वाला कोई दूसरा राजा नहीं था ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 1.100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.100.6 
एतान्यासन् महासत्त्वे शान्तनौ पुरुषर्षभे।
न चास्य सदृश: कश्चिद् धर्मत: पार्थिवोऽभवत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
ये सभी गुण महाबली और पराक्रमी शान्तनु में विद्यमान थे। उनके समान धर्मपूर्वक शासन करने वाला कोई दूसरा राजा नहीं था ॥6॥
 
All these virtues were present in Shantanu, the great and powerful man. There was no other king who ruled as righteously as him. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)