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mahabharat 1.100.54: हे राजन! मैं इस कन्या को आपकी सेवा में एक शर्त पर दूँगी। मुझे आपके समान दूसरा वर कभी नहीं मिलेगा।॥54॥   |   mahabharat अध्याय 1.100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  1.100.54 
समयेन प्रदद्यां ते कन्यामहमिमां नृप।
न हि मे त्वत्सम: कश्चिद् वरो जातु भविष्यति॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! मैं इस कन्या को आपकी सेवा में एक शर्त पर दूँगी। मुझे आपके समान दूसरा वर कभी नहीं मिलेगा।॥54॥
 
‘O King! I will give this girl to your service on one condition. I will never find another groom as good as you.’॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)