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mahabharat 1.100.53: 'पापरहित राजा! यदि आप मुझसे इस कन्या को अपनी पत्नी बनाने के लिए कह रहे हैं, तो सत्य बात अपने सामने रखें और मेरी इच्छा पूरी करने का वचन दें; क्योंकि आप सत्यवादी हैं॥53॥   |   mahabharat अध्याय 1.100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  1.100.53 
यदीमां धर्मपत्नीं त्वं मत्त: प्रार्थयसेऽनघ।
सत्यवागसि सत्येन समयं कुरु मे तत:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
'पापरहित राजा! यदि आप मुझसे इस कन्या को अपनी पत्नी बनाने के लिए कह रहे हैं, तो सत्य बात अपने सामने रखें और मेरी इच्छा पूरी करने का वचन दें; क्योंकि आप सत्यवादी हैं॥53॥
 
'Sinless King! If you are asking me to make this girl your wife, then keep the truth in front of you and promise to fulfill my wish; because you are truthful. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)