Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.100.52: 'जनेश्वर ! जब से यह सुन्दर कन्या उत्पन्न हुई है, तब से मैं इसी चिंता में हूँ कि इसका विवाह किसी अच्छे वर से हो; परन्तु मेरे हृदय में एक अभिलाषा है, उसे आप सुनिए ॥ 52॥ | mahabharat अध्याय 1.100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जातमात्रैव मे देया वराय वरवर्णिनी।
हृदि कामस्तु मे कश्चित् तं निबोध जनेश्वर॥ ५२॥
अनुवाद
'जनेश्वर ! जब से यह सुन्दर कन्या उत्पन्न हुई है, तब से मैं इसी चिंता में हूँ कि इसका विवाह किसी अच्छे वर से हो; परन्तु मेरे हृदय में एक अभिलाषा है, उसे आप सुनिए ॥ 52॥
'Janeshwar! Ever since this beautiful girl was born, I have been worried that she should be married to a good groom; but there is a desire in my heart, please listen to it. ॥ 52॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥