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mahabharat 1.100.35: आपके इस बलवान पुत्र ने महर्षि वशिष्ठ से छहों अंगों सहित सम्पूर्ण वेदों का अध्ययन किया है। वह अस्त्रविद्या में भी निपुण है, महान धनुर्धर है और युद्ध में इन्द्र के समान पराक्रमी है। 35॥   |   mahabharat अध्याय 1.100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.100.35 
वेदानधिजगे साङ्गान् वसिष्ठादेष वीर्यवान्।
कृतास्त्र: परमेष्वासो देवराजसमो युधि॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
आपके इस बलवान पुत्र ने महर्षि वशिष्ठ से छहों अंगों सहित सम्पूर्ण वेदों का अध्ययन किया है। वह अस्त्रविद्या में भी निपुण है, महान धनुर्धर है और युद्ध में इन्द्र के समान पराक्रमी है। 35॥
 
This strong son of yours has studied all the Vedas including the six organs from Maharishi Vashishtha. He is also an expert in the field of weapons, is a great archer and is as brave in battle as Lord Indra. 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)