Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.100.33: गंगाजी ने कहा- महाराज! यह वही पुत्र है जिसे आपने पूर्वकाल में मेरे गर्भ से गर्भ धारण किया था। पुरुषसिंह! यह समस्त अस्त्र-विद्या के विशेषज्ञों में श्रेष्ठ है।॥33॥ | mahabharat अध्याय 1.100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गङ्गोवाच
यं पुत्रमष्टमं राजंस्त्वं पुरा मय्यविन्दथा:।
स चायं पुरुषव्याघ्र सर्वास्त्रविदनुत्तम:॥ ३३॥
अनुवाद
गंगाजी ने कहा- महाराज! यह वही पुत्र है जिसे आपने पूर्वकाल में मेरे गर्भ से गर्भ धारण किया था। पुरुषसिंह! यह समस्त अस्त्र-विद्या के विशेषज्ञों में श्रेष्ठ है।॥33॥
Gangaji said- Maharaj! This is the same son whom you had conceived from my womb in the past. Purushsingh! He is the best among all the experts of weapons. ॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥