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mahabharat 1.100.29: अपने पिता को देखते ही बालक ने उन्हें अपने जादू से मोहित कर लिया और मोहित करके शीघ्र ही वहाँ से अदृश्य हो गया।29   |   mahabharat अध्याय 1.100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  1.100.29 
स तु तं पितरं दृष्ट्वा मोहयामास मायया।
सम्मोह्य तु तत: क्षिप्रं तत्रैवान्तरधीयत॥ २९॥
 
 
अनुवाद
अपने पिता को देखते ही बालक ने उन्हें अपने जादू से मोहित कर लिया और मोहित करके शीघ्र ही वहाँ से अदृश्य हो गया।29
 
On seeing his father, the child bewitched him with his magic and after bewitching him, soon disappeared from there. 29
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)