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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 100: शान्तनुके रूप, गुण और सदाचारकी प्रशंसा, गंगाजीके द्वारा सुशिक्षित पुत्रकी प्राप्ति तथा देवव्रतकी भीष्म-प्रतिज्ञा  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.100.20 
स समा: षोडशाष्टौ च चतस्रोऽष्टौ तथापरा:।
रतिमप्राप्नुवन् स्त्रीषु बभूव वनगोचर:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
राजा शान्तनु ने वन में सोलह, आठ, चार और आठ वर्ष, कुल छत्तीस वर्ष बिताए, और स्त्रियों के प्रति कोई अनुराग अनुभव नहीं किया।
 
King Shantanu lived in the forest for sixteen, eight, four and eight years, totalling thirty-six years, without experiencing any affection for women.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)